पंजाब इस समय अपने इतिहास की सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार की बाढ़ ने 1988 की विनाशकारी त्रासदी को भी पीछे छोड़ दिया है। राज्य के 23 जिलों में फैली इस आपदा ने अब तक 46 से अधिक लोगों की जान ले ली है और 1.75 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।
पंजाब इस समय अपने इतिहास की सबसे विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार की बाढ़ ने 1988 की त्रासदी को भी पीछे छोड़ दिया है। राज्य के कई जिलों में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि हजारों लोग बेघर हो गए हैं, सैकड़ों गांव जलमग्न हैं और लाखों हेक्टेयर फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।
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किसानों की त्रासदी
बाढ़ ने पंजाब की प्रमुख खरीफ फसलों—धान, मक्का और बासमती चावल—को भारी नुकसान पहुँचाया है। कटाई से ठीक पहले आई इस आपदा ने किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। कई किसान अब मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
1988 बनाम 2025
1988 की बाढ़ में जहां 600 से अधिक लोगों की जान गई थी, वहीं 2025 में तकनीकी सुधारों के बावजूद प्राकृतिक और मानवजनित कारणों से नुकसान की प्रकृति बदल गई है। इस बार जानमाल की हानि अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन आर्थिक और कृषि क्षति कहीं अधिक व्यापक है।
बाढ़ की वजहें
अगस्त में रिकॉर्ड 253.7 मिमी बारिश, जो सामान्य से 74% अधिक रही
हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से भारी जल प्रवाह
भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर बांधों से पानी छोड़े जाने से नदियाँ उफान पर
जनता की मांग
स्थानीय लोगों ने सरकार से तेज राहत कार्य, फसल बीमा भुगतान, और स्थायी बाढ़ नियंत्रण उपायों की मांग की है। सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है, जिसमें लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन पंजाब के लोगो खुद की मदद के साथ साथ दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते है ! इस समय भी जो इलाके बाढ़ग्रस्त है उनकी मदद के लिए वहां के लोग सबसे पहले आगे हैं!








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