केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत से हाल ही में हुई मुलाकात राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। इस मुलाकात को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आगामी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके चलते चौहान का नाम अध्यक्ष पद के संभावित उम्मीदवारों में प्रमुखता से उभरने लगा है।
दो साल बाद अहम मुलाकात
शिवराज सिंह चौहान और मोहन भागवत की यह मुलाकात लगभग दो साल के अंतराल के बाद हुई। रविवार शाम को दोनों नेताओं ने दिल्ली स्थित संघ कार्यालय ‘केशवकुंज’ में बंद कमरे में करीब 45 मिनट तक बातचीत की। सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात पूरी तरह गोपनीय रही और इसके तुरंत बाद चौहान दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए।
चौहान कार्यक्रम से सीधे संघ कार्यालय पहुँचे
इससे पहले, शिवराज सिंह चौहान प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में गायत्री परिवार के एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहाँ उनके साथ मंच पर डॉ. चिन्मय पंड्या और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद थे। कार्यक्रम के बाद वे सीधे संघ कार्यालय पहुँचे और बैठक के बाद भोपाल के लिए रवाना हो गए, जहाँ वे सोमवार को IISER, भोपाल के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।
भाजपा संगठन में बदलाव के संकेत
भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर पिछले एक साल से अनिश्चितता बनी हुई है। माना जा रहा है कि सितंबर में होने वाले उपाध्यक्ष चुनाव के बाद पार्टी अध्यक्ष का चुनाव पूरा हो सकता है। 28 सितंबर से पहले इस प्रक्रिया को पूरा करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। ऐसे में चौहान और भागवत की मुलाकात को संगठनात्मक बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ और भाजपा नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी अध्यक्ष पद के चुनाव में देरी का कारण रही है। शिवराज सिंह चौहान की संघ प्रमुख से मुलाकात इसी तालमेल की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव की संभावनाएँ और प्रबल हो गई हैं।








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